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कर्मपथ

Writer: Abhinav Yadav
Abhinav Yadav
Feb 25
1 min read

Updated: Jul 22

निकला जब-जब मैं कर्मपथ पर

अपनों ने मुझे ललकारा है।

कहते घमंड किस बात की तुम में?

जो तू इतना इठलाता है।


रोहित हर्षा द्वारा कवर फ़ोटो
रोहित हर्षा द्वारा कवर फ़ोटो

व्यंग देख हृदय खुश मेरा

अभी खुद को और बनाना है।

निकला जब-जब मैं कर्मपथ पर

अपनों ने मुझे ललकारा है।


प्रतिदिन पूछूँ प्रश्न मैं खुद से

अब नया कौन सा बहाना है?

एक क्षणिक प्रयास मात्र से

हटता न कोई अँधियारा है।


है विकल्प अब युद्ध के भाँति

करना या फिर मर जाना है।

निकला जब-जब मैं कर्मपथ पर

अपनों ने मुझे ललकारा है।

श्रेय

यह कविता अभिनव यादव द्वारा लिखी गई है, समीक्षा एड्लिन डिसूजा द्वारा की गई है, संपादन निधि पांडे द्वारा किया गया है, फोटो रोहित हर्षा द्वारा लिया गया है।


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23 Comments

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Pintu Yadav
Pintu Yadav
Mar 06
Rated 5 out of 5 stars.

बहुत अच्छा बहुत ही बढ़िया लेखनी! ❤️🧿

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Suryaprakash singh
Suryaprakash singh
Mar 02
Rated 5 out of 5 stars.

Ati uttam lekhni

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the180 rider
the180 rider
Feb 28

अति सुन्दर

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Sarita Yadav
Sarita Yadav
Feb 28
Rated 5 out of 5 stars.

Uttam lekhni

Like

Anmol Kumar
Anmol Kumar
Feb 27
Rated 5 out of 5 stars.

Adbhut lekhni....

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