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Poems


भय की परछाइयाँ
यह कविता उस युवती की व्यथा है जो जग जीतकर भी अपनी देहरी पर पराजित हो जाती है। क्योंकि समाज की दीवारें उसका आसमान समेट देना चाहती हैं।

Devanshi Sharma
Aug 102 min read


Rendezvous
A poignant ode about watching a stranger, yearning for connection, but stuck in eternal silence. Why and how? Read the poet’s thoughts here.

Rohit Damaraju
May 251 min read


कर्मपथ
कर्मपथ पर चलने वाले व्यक्ति के आत्मसंघर्ष, तिरस्कार और आत्ममंथन को अभिव्यक्त करती हुई ये कविता है “कर्मपथ”। अपनों की चुनौती, व्यंग्य और संदेह के बीच आत्मनिर्माण का संकल्प लेता हुआ कवि क्या कहना चाहता है? पढ़िए इस कविता में! यह रचना साहस, निरंतर प्रयास और निर्णायक संघर्ष की प्रेरक घोषणा है।

Abhinav Yadav
Feb 251 min read
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