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Poems


कर्मपथ
कर्मपथ पर चलने वाले व्यक्ति के आत्मसंघर्ष, तिरस्कार और आत्ममंथन को अभिव्यक्त करती हुई ये कविता है “कर्मपथ”। अपनों की चुनौती, व्यंग्य और संदेह के बीच आत्मनिर्माण का संकल्प लेता हुआ कवि क्या कहना चाहता है? पढ़िए इस कविता में! यह रचना साहस, निरंतर प्रयास और निर्णायक संघर्ष की प्रेरक घोषणा है।
Feb 251 min read


Inner Void
Resonating with the cries of a weary spirit, this poem explores the depths of self-doubt and the quest for purpose.
Mar 30, 20251 min read


प्यास
हम सबके भीतर प्यास है, संवेदना की। दूसरों की भावना से जुड़ पाना, महसूस कर पाना हम सब को भरोसे से जोड़े रखता है। तोड़ देना आसान है, पर जोड़ के मरहम लगा पाना हर किसी को नहीं आता। ये कविता सहानुभूति, संवेदना और शांति की है, भाव और त्याग से जो हमें इंसानियत से जोड़े रखती है।
Mar 28, 20241 min read


घर
स्त्री जीवन के स्वरूपों में सबसे खूबसूरत पहलू है जब वो मन से किसी से बंध जाए। ये बंधन, स्वयं वो भी नहीं तोड़ सकती। प्रेम में सिर्फ समर्पण है, एक अटूट विश्वास की ओर। उसके अंदर का स्त्रीत्व उसके जीवन को प्रेम, उम्मीद और हिम्मत से भर देता है। ये कविता समर्पण की है, प्रेम की है।
Feb 28, 20241 min read
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