मन
- Writers Pouch

- Oct 29, 2023
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Updated: Oct 25
मेरा मन,
एक हाड़ मांस के बने ढांचे में,
सहेज दिया गया है।
ना जाने कितनी कोशिशें की गईं,
कितने दावे किए गए,
पर सारे, मेरी देह से होकर गुज़र गए।
हाथ, आँंखें और इरादे,
मुझपर अधिकार जमाने की कोशिश करते रहे।


