हम सबके भीतर प्यास है, संवेदना की। दूसरों की भावना से जुड़ पाना, महसूस कर पाना हम सब को भरोसे से जोड़े रखता है। तोड़ देना आसान है, पर जोड़ के मरहम लगा पाना हर किसी को नहीं आता। ये कविता सहानुभूति, संवेदना और शांति की है, भाव और त्याग से जो हमें इंसानियत से जोड़े रखती है।
स्त्री जीवन के स्वरूपों में सबसे खूबसूरत पहलू है जब वो मन से किसी से बंध जाए। ये बंधन, स्वयं वो भी नहीं तोड़ सकती। प्रेम में सिर्फ समर्पण है, एक अटूट विश्वास की ओर। उसके अंदर का स्त्रीत्व उसके जीवन को प्रेम, उम्मीद और हिम्मत से भर देता है। ये कविता समर्पण की है, प्रेम की है।
एक लंबी हार के बाद की कामयाबी खुशी तो देती है पर अकेला कर जाती है। अकेले लड़ना और चलना आसान नहीं है, पर जब मंजिल ही सबसे अलग हो तो रास्ते होंगे ही। चाहे कितने भी कठिन परिस्थितियाँं हों, ये कविता हिम्मत करने की, और करते रहने की है उनके लिए जो लड़कियाँं अपनी शर्तों पे जीना चाहती हों।
उड़ने की कोशिश में चिड़िया कितनी बार गिरती होगी! स्त्री-मन की ख्वाहिशें भी ऐसी ही हैं, आंधियों के बाद भी वह उड़ना चाहती है। उसका आसमान उसकी उम्मीदों जितना ही बड़ा होता है, अनंत! ये कविता उम्मीद की है, हिम्मत की है। सपने देखने की क्या हद होनी चाहिए?